Monday, 5 August 2013



सबसे बड़ी घुसपैठ से जूझ रही सेना
05, Aug, 2013, श्रीनगर !   सात दिन हो गए हैं कश्मीर सीमा पर 7 सेक्टरों में 7 हजार से अधिक भारतीय सेना के जवानों ने झपकी तक नहीं ली है। उन्हें उन करीब 70 आतंकियों की तलाश है जो पिछले सोमवार की रात के अंधेरे में करीब 7 सेक्टरों में एलओसी पर लगी हुई तारबंदी को काट कर भारतीय इलाके में घुस आए थे। फिलहाल इनमें से 14 को ढेर किया जा चुका है। बाकी कहां गए फिलहाल तलाश जारी है।  उत्तरी कश्मीर के मच्छेल, केरण, तंगधार, अफरूदा, कुपवाड़ा आदि के इलाकों में 7 दिनों से भीषण मुठभेड़ें इसलिए भी जारी हैं क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने इस साल की सबसे बड़ी घुसपैठ को अंजाम दिया था। पाक सेना ने यह दुस्साहस उस समय दिखाया था जब एलओसी पर मौसम बहुत ही खराब था।
सेनाधिकारियों के बकौल, मिलने वाली खबरें, सूचनाएं और अभी तक मारे गए आतंकियों के कब्जे से मिले दस्तावेज पुष्टि करते हैं कि उत्तरी कश्मीर के विभिन्न सेक्टरों में एकसाथ घुसने वाले आतंकियों की तादाद 70 से यादा हो सकती है। हालांकि दो जवानों की शहादत देकर 14 घुसपैठियों को ढेर करने में मिली कामयाबी पर अभी खुशी नहीं मनाई जा सकती थी। सेना की 15वीं कोर के कोर कमांडर ले जनरल गुरमीत सिंह पत्रकारों के साथ बात करते हुए इसे मानते थे कि ताजा घुसपैठ भारतीय सेना के लिए इस साल का यह सबसे बड़ा चैलेंज है। वे इस पर हैरानगी प्रकट नहीं करते थे कि पाक सेना ने एकसाथ इतने सेक्टरों में यह दुस्साहस दिखाया था। हालांकि उनकी चिंता का विषय यह था कि पाक सेना के इस दुस्साहस के कारण पिछले 10 सालों से सीमाओं पर चल रहा सीजफायर खतरे में पड़ गया है।
उनके मुताबिक, 7 दिनों में मारे गए 14 आतंकियों का संबंध जैश-ए-मुहम्मद और लश्करे तौयबा से था। वे मानते थे कि वे सभी हार्डकोर और वेल ट्रेंड लगते थे। यह अंदाजा उनके द्वारा लड़ने के अंदाज से लगाया गया था। जबकि चौंकाने वाला रहस्योदघाटन वे यह प्रकट करते थे कि ताजा घुसपैठ कश्मीर में लौटती शांति को भंग करने और आने वाले दिनों में भयंकर तबाही मचाने के इरादों से थी। जबकि कड़वी सच्चाई यह थी कि खतरा अभी टला नहीं था क्योंकि जो 70 से 80 आतंकी इस ओर धकेले गए थे उनमें से मात्र 14 ही अभी तक मारे गए हैं और बाकी कहां गए फिलहाल सेना यही कहती थी कि उनके खिलाफ साल का सबसे बड़ा तलाशी अभियान जारी है।

Source: http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/113792/2/211

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